अमेरिका में राष्ट्रपति की पार्टी ढहना
अमेरिकी आवाम का गुस्सा किस हद तक बढ़ा, इसकी मिसाल कैंसास जैसे राज्य हैं, जहां से 1932 के बाद पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई सीनेटर जीता है। जब कैंसास जैसे रिपब्लिकन गढ़ में ऐसा रुझान उभरा, तो स्वाभाविक ही है कि ट्रंप की पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों- सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत गंवा दिया है, जबकि गवर्नर के चुनाव में भी कई राज्य उसके हाथ से निकल गए हैं।
संपादकीय
अमेरिका में मिडटर्म चुनावों से आया जनादेश साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि डॉनल्ड ट्रंप को दूसरी बार राष्ट्रपति चुनने का अमेरिकी जनमत को गहरा अफसोस है और उसने इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बुरी तरह हरा कर अपनी गलती कुबूल कर ली है। मतदाताओं के बड़े बहुमत ने बड़बोले और बददिमाग ट्रंप की दुस्साहसी नीतियों को सिरे से खारिज कर दिया है। दुनिया भर के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ने और फिर ईरान पर हमला करने के परिणामों की कीमत आम अमेरिकी आवाम ने भारी महंगाई के रूप में चुकाई। सरकारी कर्मचारियों की छंटनी, धनी लोगों को टैक्स छूट, और सामाजिक न्याय की नीतियों को रद्द करने के उनके फैसलों ने बहुत से उन मतदाताओं को रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ लामबंद कर दिया, जिन्होंने दो साल पहले ऊंची उम्मीदों के साथ ट्रंप को समर्थन दिया था।
मतदाताओं का गुस्सा किस हद तक बढ़ा, इसकी मिसाल कैंसास जैसे राज्य हैं, जहां से 1932 के बाद पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई सीनेटर जीता है। जब कैंसास जैसे रिपब्लिकन गढ़ में ऐसा रुझान उभरा, तो स्वाभाविक ही है कि ट्रंप की पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों- सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत गंवा दिया है, जबकि गवर्नर के चुनाव में भी कई राज्य उसके हाथ से निकल गए हैं। उभरे ऐसे जनादेश के बाद ट्रंप के लिए राज करना आसान नहीं रह जाएगा। अब ट्रंप ने कहा है कि “मेरे पास अंतिम शक्ति है, जिसे वीटो कहते हैं”, और यह कि “इस चुनाव में अगर मैं उम्मीदवार होता, तो रिपब्लिकन पार्टी की लहर चलती”, लेकिन ऐसे बयानों को हार के झटके से उपजी खीझ के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता!
असलियत यह है कि डेमोक्रेट बहुमत वाली कांग्रेस ट्रंप के खिलाफ कई प्रकार की जांच की ओर बढ़ सकती है, जिनका अंतिम नतीजा उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू होने के रूप में हो सकता है। अमेरिकी राजनीतिक शब्दावली में इस तरह के समीकरणों के बीच राष्ट्रपति को ‘लेम-डक’ (अपंग बत्तख) कहा जाता है। बेशक, संभव है कि ट्रंप इसकी परवाह किए बिना कार्यकारी आदेशों से शासन चलाने की कोशिश करें, लेकिन उससे अमेरिकी शासन व्यवस्था में अभूतपूर्व टकराव की सूरत बनेगी। इस बीच दुनिया के जिन हिस्सों ने ट्रंप की मनमानी की मार झेली है, वहां के लोग उन्हें लगी इस ठोकर पर अवश्य ही पड़पीड़क सुख की अनुभूति करेंगे।
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