Sunday, November 1, 2026
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यह तो अखिलेश यादव के लिए अपने पैर पर कुल्हाडी मारने जैसा होगा!

यह तो अखिलेश यादव के लिए अपने पैर पर कुल्हाडी मारने जैसा होगा!

सरकारी सूत्रों के हवाले से किया जा रहा है कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन बिल के लिए सरकार ने समाजवादी पार्टी को तैयार कर लिया है। लेकिन क्या सचमुच समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल पर सरकार का साथ दे सकती है? यह बड़ा सवाल है और अगर समाजवादी पार्टी ऐसा करती है तो यह बड़ा राजनीतिक फैसला होगा, जिसका असर उत्तर प्रदेश के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।

द न्यूज लांचर डेस्क

खबर है कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन बिल के लिए सरकार ने समाजवादी पार्टी को तैयार कर लिया है। यह दावा सरकारी सूत्रों के हवाले से किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखी चिट्ठी में इसका हवाला भी दिया है कि सरकार ने समाजवादी पार्टी से बात की है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव से बात की गई है और वे ही अखिलेश पर ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। 

लेकिन क्या सचमुच समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल पर सरकार का साथ दे सकती है? यह बड़ा सवाल है और अगर समाजवादी पार्टी ऐसा करती है तो यह बड़ा राजनीतिक फैसला होगा, जिसका असर उत्तर प्रदेश के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।

कहा जा रहा है कि सरकार की ओर से समाजवादी पार्टी को समझाया गया है कि परिसीमन होने पर उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सीटें 80 से बढ़ कर 120 हो जाएंगी और विधानसभा की सीटें 403 से बढ़ कर छह सौ हो जाएंगी। भाजपा आश्वस्त है कि समाजवादी पार्टी इस बात से इनकार नहीं कर सकेगी कि राज्य का प्रतिनिधित्व बढ़े। सुनने मे यह बात अच्छी लग सकती है। लेकिन अभी की राजनीति को देखते हुए अखिलेश यादव के लिए यह अच्छा प्रस्ताव फायदेमंद नहीं है।

गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी हर स्थिति में परिसीमन का विरोध करेगी। इसका कारण यह है कि कांग्रेस को पता है कि बिल पास होने के बाद सरकार अपने हिसाब से परिसीमन कराएगी और तब लोकसभा और विधानसभा सीटों की जो संरचना होगी उसमें विपक्ष के जीत कर बहुमत हासिल करने की संभावना बहुत कम रह जाएगी। इसलिए यह तय है कि कांग्रेस इस बिल के खिलाफ वोट करेगी।

सवाल है कि क्या ऐसी स्थिति में समाजवादी पार्टी यह अफोर्ड कर सकती है कि वह लोकसभा और राज्यसभा में परिसीमन बिल पर भाजपा के साथ वोटिंग करे? राज्यसभा चुनाव में भाजपा के बनाए सांसद परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी को टिकट देकर समाजवादी पार्टी पहले ही बडी गलती कर चुकी है। परिसीमन पर सरकार का साथ देना दूसरी बड़ी गलती होगी। अगर समाजवादी पार्टी यह गलती करती है तो उसे उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने का सपना देखना हमेशा के लिए छोड देना पडेगा। लोकसभा में भी उसका वह संख्या बल भविष्य में नहीं रह पाएगा, जो अभी है।

यह सही है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के पास अभी विकल्प नहीं है। लेकिन इतना खुल कर भाजपा के साथ जाने से आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी की भी वही स्थिति हो सकती है, जो बहुजन समाज पार्टी की हुई है। सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव अपने चाचा रामगोपाल यादव के दबाव में अपने पैरों पर कुल्हाडी मारने का फैसला लेंगे?

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