Sunday, November 1, 2026
The News Launcher Home ओपिनियन देश/दुनिया राज्य समाज साहित्य
देश/दुनिया

मंदिर आंदोलन से जुड़े चेहरे फिर लड़ना चाहते हैं चुनाव

मंदिर आंदोलन से जुड़े चेहरे फिर लड़ना चाहते हैं चुनाव

अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे नेताओं के साथ ही पार्टी के वे कई पुराने नेता भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने पिछले लंबे समय से हाशिए पर डाल रखा है। चुनाव लड़ने के इच्छुक ऐसे कई नेताओं ने अभी से अपनी दावेदारी घोषित कर दी है। भाजपा में मोदी-शाह का युग शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब पार्टी के कोई नेता खुद ही अपने चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे हैं।

द न्यूज लॉन्चर डेस्क

भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव और उसके दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की चुनौती और 15 साल की सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ एक चुनौती पार्टी के अंदर से भी मिलने वाली है। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे नेताओं के साथ ही पार्टी के वे कई पुराने नेता भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व ने पिछले लंबे समय से हाशिए पर डाल रखा है।

चुनाव लड़ने के इच्छुक ऐसे कई नेताओं ने अभी से अपनी दावेदारी घोषित कर दी है। भाजपा में मोदी-शाह का युग शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब पार्टी के कोई नेता खुद ही अपने चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे हैं। हालांकि पार्टी के नेता अभी उनकी ऐसी दावेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन पार्टी के ही जानकार सूत्रों का मानना है कि चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे ये नेता पार्टी के परेशानी का सबब बनने वाले हैं।

इस सिलसिले में सबसे प्रमुख नाम उमा भारती का है। मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रही मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पिछले दो चुनाव से नहीं लड़ रही हैं, लेकिन अब वे अगला चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। वे 2014 में उत्तर प्रदेश की झांसी सीट से सांसद बनी थीं औऱ नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में जल संसाधन मंत्री बनी थीं।
हालांकि उसके बाद 2019 और 2024 में सेहत खराब होने के हवाला देकर उमा भारती चुनाव से दूर रहीं। लेकिन इस बार उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। हालांकि यह नही बताया है कि वे मध्य प्रदेश की किसी सीट से लड़ेंगी या उत्तर प्रदेश से।

मंदिर आंदोलन का एक अन्य प्रमुख चेहरा रहे विनय कटियार भी चुनाव लडने के लिए ताल ठोक दी है और पार्टी से कहा है कि वे चुनाव लड़ेंगे। फैजाबाद अयोध्या से तीन बार लोकसभा और उत्तर प्रदेश से एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे विनय कटियार लंबे समय से हाशिए पर हैं लेकिन इस बार वे अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

सूत्रों के मुताबिक अगर पार्टी विनय कटियार को विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाती है तो फिर वे यह गारंटी चाहते हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में उन्हें फैजाबाद से मैदान में उतारा जाए। गौरतलब है कि फैजाबाद सीट में ही अयोध्या का क्षेत्र आता है और पिछले चुनाव में भाजपा इस सीट पर हार गई थी। समाजवादी पार्टी ने इस सामान्य सीट से दलित समुदाय के अवधेश प्रसाद को उतारा था और उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को हरा दिया था।

गौरतलब है कि अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद से अयोध्या का मामला भी भाजपा के लिए भारी दिख रहा है। इसीलिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है कि वे अय़ोध्या से चुनाव लड़े। अब विनय कटियार ने इस सीट पर दावा किया है। उन्होंने चढ़ावा चोरी पर खुल कर बड़े लोगों के खिलाफ बयान दिए थे। उन्होंने यह भी बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी चढ़ावा चोरी के मामले में उनसे फोन पर बात की है।

मंदिर आंदोलन से अलग अयोध्या, फैजाबाद, बस्ती, गोंडा के इलाके में असर रखने वाले बाहुबली नेता ब्रजभूषण शरण सिंह भी अगली बार चुनाव लड़ना चाहते हैं। वे छह बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं, लेकिन पिछली बार हरियाणा की महिला पहलवानों के यौन शोषण विवाद की वजह से वे चुनाव नहीं लड़े थे। पार्टी ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को उनकी जगह टिकट दिया था। वे जीत भी गए थे।

अब ब्रजभूषण शरण सिंह निचली अदालत से बरी हो गए हैं। उनका कहना है कि उन्हें कम से कम एक बार और सांसद बनना है। अगर भाजपा ने अगले लोकसभा चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया तो वे पार्टी के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

उमा भारती, विनय कटियार और ब्रजभूषण शरण सिंह के अलावा भी पार्टी के कई पूर्व सांसद और पूर्व विधायक आगामी चुनाव के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

Related Articles

Comments

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Leave a Comment