दिल्ली को पुलिस स्टेट बनाया जा रहा है!
देश के अलग अलग राज्यों से बुला कर अर्धसैनिक बलों की 221 टुकड़ियां दिल्ली में तैनात की गई। करीब 23 हजार जवान तैनात किए गए। इनके साथ दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवानों की तैनाती अलग हुई। अर्धसैनिक बलों की तैनाती पहले 12 अक्टूबर तक के लिए की गई थी, लेकिन उसके बाद उसे एक बार बढ़ाया गया और अब 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है।
द न्यूज लॉन्चर डेस्क
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में जिस तरह अर्धसैनिक बलों की तैनाती स्थायी होती जा रही है, उसे देखते हुए लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली-एनसीआर को पुलिस स्टेट बनाने की ठान ली है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में व्यापक गड़बड़ियों और उसके लिए जिम्मेदार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों और नागरिक समूहों के आंदोलन के मद्देनजर इस दिल्ली में करीब 40 हजार सुरक्षा बल तैनात हैं। यह अभूतपूर्व स्थिति है। इससे पहले कभी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं की गई।
अक्टूबर के पहले हफ्ते में विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन के ऐलान और खासकर कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर आंदोलन को लेकर अर्धसैनिक बलों की दिल्ली-एनसीआर में तैनाती की गई थी। देश के अलग अलग राज्यों से बुला कर अर्धसैनिक बलों की 221 टुकड़ियां दिल्ली में तैनात की गई। करीब 23 हजार जवान तैनात किए गए। इनके साथ दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवानों की तैनाती अलग हुई। अर्धसैनिक बलों की तैनाती पहले 12 अक्टूबर तक के लिए की गई थी, लेकिन उसके बाद उसे एक बार बढ़ाया गया और अब 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है।
ध्यान रहे एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली होने वाली है और 'पीपल अगेस्ट एसआईआर’ जैसे नए संगठनों के साथ-साथ वामपंथी छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी व आम आदमी पार्टी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में संभव है कि 31 अक्टूबर के बाद भी अर्धसैनिक बलों की तैनाती बनी रहे।
अर्धसैनिक बलों की इतनी बड़ी तैनाती होने पर उनके लिए ट्रांसपोर्ट और रहने का बंदोबस्त भी करना होता है। इसीलिए इन दिनों दिल्ली में हर तरफ थाने के आसपास दर्जनों गाड़ियां, बस आदि खड़े मिलेंगे, जो अर्धसैनिक बलों के मूवमेंट के लिए तैयार रखे गए हैं। लाठी, डंडों और रायफलों से लैस पुलिस और अर्धसैनिक बलों की हर तरफ मौजूदगी साफ देखी जा सकती है।
40 हजार सुरक्षाबलों की तैनाती का आंकड़ा तो सिर्फ राजधानी दिल्ली का ही है। मीडिया की अलग-अलग रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि पुलिस कार्रवाई का दायरा बहुत बड़ा है। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस भी दिल्ली की सीमाओं से लगे अपने सीमावर्ती जिलों- नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि में अपना काम कर रही है।
दिल्ली से सटे इन जिलों की सीमाओं पर पुलिस तैनात है और बैरिकेडिंग की गई है। इन पुलिस बलों की गिनती दिल्ली में तैनात सुरक्षाबलों में नहीं हो रही है। अगर पड़ोसी राज्यों की पुलिस की संख्या जोड़ी जाए तो आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाएगा और पुलिस तैयारी का स्केल भी बहुत बड़ा दिखने लगेगा।
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