Sunday, November 1, 2026
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भाजपा और उसके सहयोगी दलों में दरक रहा है अनुशासन

भाजपा और उसके सहयोगी दलों में दरक रहा है अनुशासन

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा हो गया है और कहा जा रहा है कि कई मंत्रियों को इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया है लेकिन वे इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। कथित तौर पर कई मंत्रियों ने कहा है कि अगर हटाना है तो प्रधानमंत्री खुद ही उन्हें सरकार से हटा दे। अगर ऐसा है तो यह भाजपा की पिछले 12 साल की राजनीति में बिल्कुल नई बात है।

द न्यूज लॉन्चर डेस्क

भारतीय जनता पार्टी और केंद्र में उसकी सरकार लगातार मुसीबतों से घिरती जा रही है। एक ओर जहां चुनाव आयोग की गडबडियों को लेकर विपक्षी दलों ने उसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए देशव्यापी आंदोलन छेड रखा है, वहीं दूसरी ओर उसके और उसके गठबंधन एनडीए में शामिल घटक दलों के सांसद बागी तेवर अपनाए हुए हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंत्रिपरिषद में फेरबदल नहीं कर पा रहे हैं।

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा हो गया है और कहा जा रहा है कि कई मंत्रियों को इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया है लेकिन वे इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। कथित तौर पर कई मंत्रियों ने कहा है कि अगर हटाना है तो प्रधानमंत्री खुद ही उन्हें सरकार से हटा दे। अगर ऐसा है तो यह भाजपा की पिछले 12 साल की राजनीति में बिल्कुल नई बात है।

चूंकि सरकार का इरादा संसद का विशेष सत्र बुला कर महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन विधेयक पारित कराने का है, इसलिए उसे लोकसभा में एक-एक सीट की चिंता है। इसीलिए कई सांसदों पर अनुशानहीनता के आरोप लगने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।

सांसदों की अनुशासनहीनता के मामले फिलहाल भाजपा में ही नहीं, एनडीए के दूसरे घटक दलों में भी खुल कर सामने आ रहे हैं, जिससे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चिंतित है और उसने अपने सहयोगी दलों के नेतृत्व को समझाइश दे रखी है कि अभी वे किसी भी सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने से बचें।

भाजपा की इस चिंता में वह चुनाव आयोग भी शामिल है जो इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में भारी गडबडियों को लेकर विवादों में घिरा हुआ है। भाजपा की चिंता को लेकर चुनाव आयोग कितना संवेदनशीलता साफ दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट पिछले दो साल से खाली है। इस साल मई में खाली हुई असम की नगांव सीट पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव करा लिया है लेकिन बशीरहाट सीट खाली रखी गई है।

वहां चुनाव नहीं कराने का एकमात्र कारण यह है कि मुस्लिम बहुल इस सीट पर उपचुनाव हुआ तो भाजपा नहीं जीत पाएगी। जीतना किसी विपक्षी पार्टी को ही है, इसलिए चुनाव आयोग उस सीट पर उपचुनाव ही नहीं करा रहा है। इसके बावजूद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले कठघरे में खड़े किए जा रहे हैं।

बहरहाल, बिहार में जनता दल (यू) के कई सांसद बागी हो गए हैं। बांका के सांसद गिरधारी यादव ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते हुए ही अपने बेटे को राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। लोकसभा में भी वे सरकार और अपनी पार्टी की लाइन से अलग बोलते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

इसी तरह भागलपुर के सांसद अजय मंडल अपने प्रतिद्वंद्वी शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को जनता दल (यू) में शामिल करने और राज्य सरकार में मंत्री बनाए जाने से नाराज होकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। तीसरी सांसद लवली आनंद के पति आनंद मोहन और मधेपुरा के सांसद दिनेशचंद्र यादव भी पार्टी लाइन से हट कर काम कर रहे है। लेकिन इनमें से किसी के किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। क्योंकि इस समय एनडीए एक भी सांसद गंवाने की जोखिम नहीं ले सकता है।

इन्हीं सारी खबरों के बीच भाजपा के अंदर की खींचतान भी सामने आ रही है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ केंद्रीय मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा खोल रखा है। पिछले दिनों उन्होंने अपने गृह जिले में वन विभाग द्वारा कुछ आदिवासियों के मकान तोडे जाने को मुद्दा बना कर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला था और वे धरने पर भी बैठ गए थे। इस मामले में संगठन महासचिव चंद्रशेखर के दखल के बाद शिवराज के तेवर ढीले पडे।

उधर उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की आठ सीटों पर जिस तरह बिल्कुल नए गुमनाम से चेहरे तय किए गए, उससे भी प्रदेश में पार्टी के कई नेता नाराज हैं। राज्यसभा चुनाव में अपनी उपेक्षा से नाराज दो बार सांसद रहे और उत्तर प्रदेश में भाजपा का बड़ा दलित चेहरा रहे धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी मे शामिल हो रहे हैं। ऐसे ही पिछले दिनों ओडिशा के पुराने नेता और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने बिना नाम लिए पार्टी के कई नेताओं पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया।

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